कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से किसे गुजारना पड़ता था?
हालदार साहब को|
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हालदार साहब को हर .............दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था।
15 वे दिन
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कस्बे की विशेषता बताइए
कस्बा बहुत बड़ा नहीं था जिसे पक्का मकान कहां जा सके वैसे कुछ मकान जिसे बाजार कहा जा सके वैसा एक ही बाजार ।एक लड़कों का स्कूल, एक लड़कियों का स्कूल, सीमेंट का कार
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नगर पालिका कौन से कार्य करती थी?
कभी कोई सड़क पति करवा दी कभी कुछ पेशाब घर बनवा दिए कभी कबूतरों की छतरी बनवा दी कभी-कभी सम्मेलन करवा दिए।
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शहर के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर किसकी मूर्ति लगाई गई थी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
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मूर्ति किस से बनी हुई थी?
संगमरमर की।
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यह कहानी किस के बारे में
प्रतिमा के बारे में बल्कि उसके भी एक छोटे से हिस्से के बारे में।
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मूर्ति किसने बनाई थी?
इकलौते हाई स्कूल के इकलौते ड्राइंग मास्टर मोतीलाल जी ने बनाई थी।
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मोतीलाल को यह अवसर जोर दिया गया था?
उन्होंने मूर्ति को महीने भर में बनाकर देने का विश्वास दिलाया था।
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नेता जी की मूर्ति कैसी दिखती थी?
मूर्ति संगमरमर की थी टोपी की नोक से कोर्ट के दूसरे बटन तक 2 फुट ऊंची से भ्रष्ट और सुंदर थी नेताजी सुंदर लग रहे थे कुछ मासूम और कम से फौजी वर्दी में।
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मूर्ति को देखते हैं क्या याद आने लगता
दिल्ली चलो और तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। याद आने लगता
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इसे सराहा जा सके ।वाक्यांश के लिए एक शब्द
सराहनीय
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इसे सराहा जा सके ।वाक्यांश के लिए एक शब्द
सराहनीय
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जिसे सराहा जा सके ।वाक्यांश के लिए एक शब्द
सराहनीय
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इस दृष्टि से यह ............. और............ प्रयास था।
सफल और सराहनीय
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मूर्ति में किस चीज की कसर थी जो देखते ही खटकती थी?
नेताजी की आंखों पर चश्मा नहीं था चश्मा तो था लेकिन संगमरमर का नहीं था एक सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला प्रेम मूर्ति को पहना दिया गया था।