पशु समाज में प्रजातंत्र की स्थापना का ‘क्रांतिकारी’ परिवर्तन आया।
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‘क्रांतिकारी’ परिवर्तन से क्या आशय है?
एक बार वन के पशुओं को ऐसा लगा कि वे सभ्यता के उस स्तर पहुँच, जहाँ उन्हें एक अच्छी शासन-व्यवस्था अपनानी चाहिए और इसके लिए प्रजातंत्र की स्थापना करनी चाहिए।
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पशु समाज में हर्ष की लहर क्यों दौड़ पड़ी?
पशु समाज ने जब प्रजातंत्र की स्थापना की बात सोची तो उन्हें लगा कि अब उनके जीवन में सुख-समृद्धि और सुरक्षा का स्वर्ण युग आ जाएगा इसलिए पशु में हर्ष की लहर दौड़ पड़
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प्रजातंत्र की स्थापना की कल्पना से भेड़ों में कौन-सी आशाएँ जागने लगी?
उनका भय दूर हो जाएगा।उनके प्रतिनिधियों से कानून बनवाएँगे, कोई जीवधारी किसी को न सताएँ, न मारे। सब जिएँ और जीने दें
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भेड़ियों ने यह क्यों सोचा कि अब संकटकाल आ गया है?
वन – प्रदेश में भेड़ों और अन्य छोटे पशुओं को मिलाकर उनकी संख्या नब्बे प्रतिशत थी ,यह कानून बना दिया कि कोई पशु किसी को न मारे तो भेड़िये को खाना कैसे मिलेगा। इसलि
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भेड़ें और भेड़िये किसका प्रतीक हैं?
भेड़ सामान्य जनता का प्रतीक है। भेड़िये उन राजनीतिज्ञों का प्रतीक हैं जो सामान्य जनता को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फँसाकर अपना स्वार्थ साधते हैं।
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सियार ने भेड़ियों को सरकस में जाने की सलाह क्यों दी?
वन-प्रदेश में भेड़ों की संख्या अधिक थी और यदि प्रजातंत्र की स्थापना हो गई तो भेड़ियों के पास भागने के अलावा कोई चारा नहीं था इसलिए सियार ने भेड़ियों को सरकस में जा
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भेड़ियों ने बूढ़े सियार की बात मानने का निश्चय क्यों किया?
उन्हें इससे बचाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था. ऐसे समय में बूढ़े सियार ने जब उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई कि वह कोई न कोई योजना बनाकर भेड़ियों की मदद कर देगा तो भे
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बूढ़े सियार ने सियारों को क्यों रंगा?
बूढ़े सियार ने भेड़ियों का चुनाव-प्रचार तथा भेड़ों को भ्रमित और गुमराह करने के लिए सियारों को रंगा था।
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पहले भेड़ें क्यों भागने लगीं?
अपने सामने संत के रूप में भेड़िये को देखा तो वे डर के मारे भागने लगीं